Friday, February 25, 2011

भ्रष्टाचार धर्म है या अधर्म-कौन निर्णय करेगा ?

आज सभी पानी पी पी कर कह रहे हैं ,कि देश मे भ्रष्टाचार चर्म सीमा पर है.जो नही कर पा रहे हैं,सबसे ज्यादा परेसान हैं.राजनीति के खिलाडी अब उद्योगपतियों की श्रेणी मे आ गये हैं.देश आज़ाद हुआ,उन्होने आज़ादी को सबसे पहले भुना लिया.जिन्होने देश को फ़ाँके कर कर के गुजर गये,जो बचे अब गुजर जाने की तैयारी कर रहे हैं.उन्होने कभी भ्रष्टाचार का रोना नहीं रोया.
भ्रष्टचार धर्म है ,या अधर्म कौन परिभाषित करेगा.जो कर रहे हैं ,वह कहेगे कि धर्म है, जो नही कर रहे या नहीं कर पा रहे हैंवह कहेंगे अधर्म है.यह धन कमाने का एक तरीका है,किसी की जेब से नहीं जाता,आकाशीय मार्ग से विद्युत गति से आता हैऔर जेब के माध्यम से जमीन मे गड जाता है.अब चूना किसको लगा है,कहते हैं कि देश को नुकसान हुआ.जनता भूख से मर जाती है,किसका नुकससान हुआ ?
भ्रष्टाचार के जीन्स पैदायसी होते हैं.हाथ मे धन की लकीर होती है,धन बेयीमानी ,चोरी , डकेती और हेराफ़ेरी से ही ज्यादा कमया जा सकता है,ईमानदारी से नहीं.ईमानदार सिर्फ़ रोटी दाल आराम से खा सकता है,मकान लोन से बनाता है, ,शादी,बच्चों की शिक्षा ,उधारी से ही बनाता है.भ्रष्टाचार उसके लिये अधर्म है.क्योकि वह गीता,कुरान बाइबिल,गुरुग्रंथ से यही शिक्षा ग्रहण करता है,भ्रष्टाचारी भी इन्ही सब को पढते है,लेकिन वह अपना अलग अर्थ निकालते हैं.
कोई नृप होय हमे का हानी-चेरी छाँणि न कहावउँ रानी.यही संतोष धन है.

Monday, August 23, 2010

गरीब को गरीब ही रहने दो-कोई आवाज न दो.

संविधान द्वारा जाति सूचक शब्दों के उपयोग पर रोक लगा दी है.गरीब भी एक बहुत बडी जाति है,इसके अन्तर्गत चालीस फ़ीसदी जनता आती है.इस गरीब का कोई जाति या मजहब नही है,लेकिन जाति के आधार पर राजनीति करने वालों ने इनको अपनी अपनी जाति में शामिल कर लिया.
सरकार द्वारा समस्त योजनाओं में इनके लिये बजट का तीस फ़ीसदी हिस्सा सुरक्षित किया जाता है और राज्यों को उसके अनुपालन के लिये गजट प्रकाशित कर दिया जाता है.कितने ही एन.जी.ओ.इस आबंटित राशि को गरीबों तक पहुँचाने का बेडा उठाते हैं.
ससंद /विधान सभा मे सासंदों /विधायका द्वारा इन गरीबों की चर्चा पर कुल समय का चालीस फ़ीसदी समय लगाया जाता है. इन्हीं चर्चाओं को करते करते पाँच साल व्यतीत हो जाते हैं.
फ़िर चुनाव आते हैं और गरीब फ़िर मैदान मे आज़ाता है.उससे किसी ने भी नहीं पूँछा,क्या हुआ,कैसे हो.
वोट डलवाने के लिये लठैत,बन्दूकधारी इनके आगे पीछे घूमने लगते हैं.यही गरीब चालीस फ़ीसदी वोट डाल कर सरकार की स्थापना करते हैं,बाकी लोग जो वोट का इस्तेमाल नहीं करते ,इनके हाल का बखान ,नंगी धडंगी फ़ोटो के साथ, पेपर ,मेगजीन में करके अपनी जेबें भरते रहते हैं.
शायद ही किसी अन्य देश में ऐसा गरीब नहीं बिकता होगा,जैसा कि इस देश में बिकता है,चाहे पिपली लाइव या लगान,स्ल्मडोग,आदि आदि, सब गरीबों के ही जीवन पर बनते हैं और धडल्ले से बिक कर,एवार्ड से नवजते हुये, अमीरों की झोली में समा जाते हैं.
देश में पंचायत राज की स्थापना भी हो गयी,व्यवस्था भी कायम हो गयी.सीटे भी आरक्षित हो जाती हैं,चुनाव भी गरीब लडते हैं,लेकिन दमदार पार्टियों के दम खम पर,वही चुनाव पर खर्च करते है.यहाँ भी गरीबों को दिय गये अनुदान पर इन्ही पार्टियों का हक होता है,गरीबों का नहीं.

अब गरीब को गरीब कहना छोड दो,वह अब ज्यादा दिनों वे तक जीवित नहीं रह सकते,उनका वर्चस्व समाप्ति पर है.


Tuesday, June 16, 2009

महाशक्ति का रैप (व्यभिचार)-भारतीय अस्मिता पर बार- बार चोट

महाशक्ति का रैप (व्यभिचार)भारतीय अस्मिता पर बार-बार चोट

अनादिकाल से नारी को महाशक्ति की तरह पूजा जाता है ,लेकिन उसकी तरफ़ किसी का ध्यान नहीं जाता है कि भारतीय संविधान मैं उनको कोई जगह दी जा सके .अंग्रेजों द्वारा बनाया गया कानून अभी तक बरक़रार है .हर दिशाओं मैं नै नै खोजें जरी हैं ,लेकिन इसतरफ महा पंचायत के मेम्ब्रानों का ध्यान क्यों नहीं जाता है .आरक्षण ही कोई दिशा नहीं है ,उनपर विचार भी आवश्यक है ,आरक्षण एक मुद्दा है ,नारी कि लज्जा एक सवाल है ,जो कि भारतीय संसद मैं कुछ समयापर्क नेताओं द्वारा हंसने हसांने के माहोल मैं नेताओं द्वारा दलीलें दी जाती हैं .आज नारी ही नारी कि दुश्मन हो गयी है.आज नारी पर अत्याचार भी एक व्यभिचार जैसा ही है ।
संसद मैं ३०% जगह मिलजाने से क्या नारी को सुरक्षा मिलेगी ,हमें संदेह है.जब कानून ही सहायता नहीं करता है ,तब संसद क्या करेगी .पहले संसद को संविधान मैं परिवर्तन करना होगा ,तभी कुछ हो सकता है।
पुलिस थानों को सुधारना होगा ,पुलिसिया व्यवस्था सुधारनी होगी अन्यथा नारियां तालेबानी प्रवृति अपनानें के लिए तैर हो जाएँगी ,तब कोई भी कुछ नहीं कर सकेगा।
लाज एक नारी लुटती है ,उस ख़बर को मीडिया कैश करने लगता है .यह भी नारी पर एक व्यभिचार है .इस पर भी रोक लगनी होगी .दूसरे शब्दों मैं नारी पर व्यभिचार भी एक ख़बर बनकर बिकने लगता है।

हम कब भारतीय होंगे हमारी अस्मिता कब और कैसे सुरक्षित होगी ,क्या फिर से गुलाम बन कर ही दम लेंगे ।